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श्री हनुमान चालीसा : हर दोहे और चौपाई का अर्थ | Shri Hanuman Chalisa: Read, Understand, and Reflect

श्री हनुमान चालीसा: हर दोहे और चौपाई का अर्थ Shri Hanuman Chalisa: Read, Understand, and Reflect यहां आप श्री हनुमान चालीसा के सभी दोहे और चौपाइयों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में पढ़ सकते हैं। प्रत्येक चौपाई पर क्लिक करके आप उसके विस्तृत अर्थ वाले पृष्ठ पर जा सकते हैं। यह पृष्ठ आपके आध्यात्मिक अध्ययन को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। Here you can read all the Doha and Chaupai of Shree Hanuman Chalisa in both Hindi and English. Click on each line to navigate to a dedicated page with a detailed explanation. This page is designed to make your spiritual study easy and accessible. दोहे | Dohas श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि । बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि ॥ Shree Guru Charana S...
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Bhagavad Gita Chapter 1: Arjuna Vishada Yoga (Full Sanskrit Shlokas & Meanings)

Shrimad Bhagavad Gita: Chapter 1 Arjuna Vishada Yoga (The Yoga of Arjuna's Dejection) Total Shlokas: 47 Shloka 1.1 धृतराष्ट्र उवाच | धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः | मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ||1|| IAST: dhṛitarāśhtra uvācha | dharma-kṣhetre kuru-kṣhetre samavetā yuyutsavaḥ | māmakāḥ pāṇḍavāśhchaiva kimakurvata sañjaya Transliteration: dhritarashtra uvacha | dharma-kshetre kuru-kshetre samaveta yuyutsavah | mamakah pandavashchaiva kimakurvata sanjaya Meaning: Dhritarashtra said: O Sanjay, after gathering on the holy field of Kurukshetra, and desiring to fight, what did my sons and the sons of Pandu do? Shloka 1.2 सञ्जय उवाच । दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा । आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ।। 2।। IAST: sañjaya uvācha | dṛiṣhṭvā tu pāṇḍavānīkaṁ vyūḍhaṁ duryodhanastadā | āchāryamupasaṅga...

मन को जगत् की बातों से खाली करें | आस्तिकता की आधारशिलाएँ | परम पूज्य श्री राधा बाबा

🕉️ आस्तिकता की आधारशिलाएँ (पृष्ठ 57–59 से प्रतिलिप) मन को जगत् की बातों से खाली करके प्रियतम प्राणनाथ की छवि के स्मरण से भरें जब तक हम परिस्थितियों को बदलने की कोशिश करेंगे, व्याकुल रहेंगे। जिस दिन प्रभु के विधान पर विश्वास कर लेंगे, उसी क्षण सारा दुःख मिट जाएगा। अवश्य पढ़ें/सुनें। पारिवारिक उलझनों को लेकर आपको उद्वेग होता है, यह स्वाभाविक है; पर जब तक इससे छूटने का जो वास्तविक उपाय है, उसे नहीं करेंगे, तब तक व्याकुलता मिटनी और उद्वेग मिटना बड़ा ही कठिन है। परमार्थ के पथिक के लिये यह सर्वथा उड़ा देने की चीज़ है। पर आपका मन कमजोर है; मन में आसक्ति है और सबसे बड़ी बात यह है कि आपका मन जैसा प्रभु के चरणों में लगना चाहिये वैसा नहीं लग रहा है। इसलिये ये उलझनें विकट रूप में दीख रही हैं। सच मानिये, बहुत अधिक आवश्यकता इस बात की है कि आप इन परिस्थितियों को बिल्कुल महत्त्व न देकर एकान्त एवं शान्तचित्त से अपना मन प्रभु के चरणों में लगाने की चेष्टा करें। यदि आप चाहेंगे कि परिस्थिति पलटे तो ऐसा होना बड़ा ही कठिन है। इसका कारण...